शुंग वंश (Shunga Dynasty)

शुंग वंश का इतिहास

शुंग वंश हमारे देश के इतिहास में एक ऐसा राजवंश था, जिसने मौर्य साम्राज्य के अंत के बाद मगध क्षेत्र में शासन संभालने का काम किया और लगभग 185 ईसा पूर्व से 73 ईसा पूर्व तक शासन किया।  इस वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने की थी, जो मौर्य सम्राट बृहद्रथ मौर्य का सेनापति था। … Read more

नंद वंश का पूरा इतिहास (345–321 BC): महापद्म नंद से धनानंद तक

नंद वंश का इतिहास महापद्म नंद से धनानंद तक

आज हम इतिहास के इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए नंद वंश को समझेंगे।  हमने पिछले ब्लॉग में शिशुनाग वंश को विस्तार से समझा है। उसके अंतिम शासक के पतन के बाद महापद्म नंद ने सत्ता संभाली और नंद वंश की शुरुआत हुई। read more महापद्म नंद ने नागदशक को कैसे और क्यों हटाया इतिहासकारों … Read more

शिशुनाग वंश का इतिहास: स्थापना, शासक, प्रशासन, धर्म और पतन (413 ई.पू.)

शिशुनाग वंश का इतिहास और मगध साम्राज्य का विस्तार

इस वंश की स्थापना लगभग 413 ईसा पूर्व में शिशुनाग द्वारा हुई थी। शिशुनाग पहले काशी (वाराणसी) के अमात्य (मंत्री) या गवर्नर थे। मगध के इतिहास को अगर ध्यान से देखें, तो हमें एक बात साफ समझ आती है यहां सत्ता कभी स्थिर नहीं रही। एक वंश जाता है, तो उसकी जगह दूसरा वंश उभरकर … Read more

हर्यक वंश का इतिहास: बिंबिसार से नागदासक तक पूरी जानकारी

हर्यक वंश का इतिहास

जब भी हम प्राचीन भारत के इतिहास को समझना शुरू करते हैं, तो एक नाम बार-बार सामने आता है- हर्यक वंश। हमने अपने पिछले ब्लॉग में भी देखा था कि मगध कैसे धीरे-धीरे एक शक्तिशाली महाजनपद बना, लेकिन असली सवाल है इसकी शुरुआत कहाँ से हुई? हर्यक वंश वही दौर है, जहाँ से मगध सिर्फ … Read more

मगध के प्रमुख राजवंश और उनके शासक

आज हम सभी मगध साम्राज्य में शासन करने वाले सभी वंश को जानेंगे, जैसा कि हमने अपने पिछले ब्लॉग में आपको बताया था कि मगध महाजनपद 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली क्यों था—क्यों?, कैसे?, और कब? अगर आपने अभी तक वह ब्लॉग नहीं पढ़ा है, तो आप उसे जाकर जरूर पढ़ सकते हैं। अब ज़रा … Read more

महाजनपद काल क्या है? 16 महाजनपद की विशेषताएँ

महाजनपद काल के 16 महाजनपदों का इतिहास

आज हम महाजनपद काल को समझेंगे, जैसा कि वैदिक काल के समय में हम लोग आज की तरह किसी निश्चित राज्य या देश की पहचान से नहीं जुड़े होते थे। उस समय समाज मुख्य रूप से कबीलों और वंशों के आधार पर संगठित था। लोग अपने कबीले की पहचान से जाने जाते थे और हर … Read more