मीमांसा दर्शन (पूर्व मीमांसा) – महर्षि जैमिनि, सिद्धांत, ग्रंथ और ऐतिहासिक महत्व
‘मीमांसा’ शब्द संस्कृत धातु ‘मन्’ (सोचना या विचार करना) से बना है, इसका शाब्दिक अर्थ है—गहन विचार, परीक्षण, विवेचना या किसी विषय की तर्कपूर्ण जाँच करना। प्राचीन भारत में जब वैदिक यज्ञों और कर्मकाण्डों का स्वरूप अधिक विस्तृत एवं जटिल हो गया, तब उनके सही अर्थ, विधि-विधान और महत्व को स्पष्ट करने की आवश्यकता महसूस … Read more