नंद वंश का पूरा इतिहास (345–321 BC): महापद्म नंद से धनानंद तक

आज हम इतिहास के इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए नंद वंश को समझेंगे। 

हमने पिछले ब्लॉग में शिशुनाग वंश को विस्तार से समझा है। उसके अंतिम शासक के पतन के बाद महापद्म नंद ने सत्ता संभाली और नंद वंश की शुरुआत हुई। read more

महापद्म नंद ने नागदशक को कैसे और क्यों हटाया

इतिहासकारों के अनुसार ये एक कमज़ोर और अलोकप्रिय शासक माना जाता है, शासन में अव्यवस्था और जनता में असंतोष बढ़ गया था इसी स्थिति का फायदा उठाकर महापद्म नंद ने विद्रोह/सत्ता परिवर्तन किया। 

कुछ स्रोतों के अनुसार:- महापद्म नंद ने सैनिक बल या राजनीतिक साजिश के जरिए सत्ता पर कब्ज़ा किया लेकिन यह पूरी तरह साफ नहीं है कि–

  • उसने सीधे हत्या की
  • या सिर्फ हटाकर खुद राजा बन गया

कुछ स्रोत जैसे –

पुराणों में बताया गया है कि महापद्म नंद ने क्षत्रियों का विनाश किया, उसे “एकराट” कहा गया है। लेकिन यहाँ ये detail नहीं है कि उसने नागदशक को कैसे हटाया, बस इतना संकेत मिलता है कि उसने बलपूर्वक सत्ता हासिल की। 

महावंश (बौद्ध स्रोत) इसमें नंद वंश का जिक्र मिलता है लेकिन सत्ता कब्ज़ाने का तरीका साफ़ नहीं बताया गया। 

जैन ग्रंथ(परिशिष्टपर्व) में नंदों के उदय का वर्णन है कुछ जगह संकेत मिलता है कि महापद्म नंद का उदय साधारण पृष्ठभूमि से हुआ

यूनानी स्रोत (ex- कर्टियस रूफस, डायोडोरस सिकुलस) ये लोग नंद राजा(धनानंद के समय) का वर्णन करते हैं। उसे बहुत धनवान और शक्तिशाली बताते हैं लेकिन महापद्म नंद ने सत्ता कैसे छीनी ये detail नहीं देते। 

  • लेकिन ध्यान रखो इन स्रोतों में कुछ जानकारी अलग-अलग और विवादित भी है।

महापद्म नंद का उदय (Rise to Power)

महापद्म नंद नंद वंश का संस्थापक था, जिसने लगभग 345 ईसा पूर्व से 329 ईसा पूर्व तक मगध पर शासन किया। कुछ ग्रंथों में उसे “निम्न कुल” (non-kshatriya) का बताया गया है इसलिए उसका सत्ता में आना एक सामाजिक बदलाव भी था। 

  • महापद्म नंद को ही “पहला गैर-क्षत्रिय शासक” भी कहा जाता है। 
  • एकराट(एकछत्र शासक) इसका अर्थ है जिसने पूरे भारत (आर्यावर्त) पर प्रभुत्व स्थापित किया हो। 

महापद्म नंद ने कई शक्तिशाली राज्यों को हराकर अपना साम्राज्य बढ़ाया।  जैसे- काशी, कोसल, कुरु, पंचाल, अश्मक आदि। इन विजयों के कारण मगध फिर से उत्तर भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन गया। उसने एक मजबूत सेना और आर्थिक आधार तैयार किया।

महापद्म नंद के 8 पुत्र थे, जो उसके बाद राजा बने। इन सभी को मिलाकर कुल 9 नंद शासक माने जाते हैं।

शासक का नामशासनकाल (लगभग)विशेष जानकारी
महापद्म नंद345–329 ईसा पूर्वनंद वंश का संस्थापक,
पांडुक (Panduka)महापद्म नंद का पुत्र
पांडुगति (Pandugati)ये भी पुत्र
भूतपाल (Bhutapala)पुत्र
गोविषाणक –(Govishanaka)पुत्र
दशसिद्धक (Dashasiddhaka)पुत्र
कैवर्त (Kaivarta)
धनानंद329–321 ईसा पूर्वअंतिम नंद शासक

अब अगर सबसे प्रसिद्ध शासकों को देखा जाय तो –

  • महापद्म नंद (संस्थापक)
  • धनानंद (अंतिम शासक)

क्या 8 शासकों ने सच में शासन किया?

पुराणों के अनुसार

महापद्म नंद के 8 पुत्र थे, और सभी ने एक-एक करके शासन किया।

लेकिन इतिहासकारों की नजर में इन 8 शासकों का कोई ठोस प्रमाण (inscriptions/coins) नहीं मिलता।

क्या धनानंद भी महापद्म नंद का पुत्र था?

पुराणों में देखा जाए तो 

  • महापद्म नंद → उसके 8 पुत्र → उनमें से एक धनानंद

लेकिन कुछ यूनानी (Greek) स्रोतों में धनानंद को सीधे नंद वंश का अंतिम शक्तिशाली राजा बताया गया है, पर उसके पिता का नाम साफ नहीं बताया। इसीलिए इसे 100% पक्का ऐतिहासिक प्रमाण नहीं माना जाता। 


इस वंश का अंतिम शासक (धनानंद)

धनानंद नंद वंश का अंतिम और सबसे प्रसिद्ध शासक था, जिसने लगभग 329 ईसा पूर्व से 321 ईसा पूर्व तक मगध पर शासन किया। वह महापद्म नंद का पुत्र माना जाता है।

इसके समय में, भारी कर (tax) वसूले जाते थे जिससे उसके राज्य की आय बहुत अधिक थी।  इसी कारण उसे “धन का स्वामी”(धनानंद) कहा गया। 

धनानंद के पास एक बहुत बड़ी सेना थी, जिसका वर्णन यूनानी स्रोतों में मिलता है-

  • लगभग 2 लाख पैदल सैनिक
  • 20 हजार घुड़सवार
  • 2000 रथ
  • 3000 हाथी

जब सिकंदर भारत के उत्तर-पश्चिम तक पहुँचा, तब उसे नंद साम्राज्य की शक्ति के बारे में जानकारी मिली। नंदों की विशाल सेना के डर से ही सिकंदर के सैनिक आगे बढ़ने से हिचकिचाए थे। 

यूनानी इतिहासकारों जैसे- डायोडोरस सिकुलस, कर्टियस रूफस ने नंद शासक को बहुत धनवान और शक्तिशाली बताया है।  

नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद के बारे में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि “धनानंद” नाम सीधे किसी भी यूनानी स्रोत में नहीं मिलता। यूनानी इतिहासकार उसे अलग-अलग नामों से उल्लेखित करते हैं। डायोडोरस सिकुलस के अनुसार नंद शासक का नाम “Agrammes” या “Xandrames” मिलता है, जिसे अत्यधिक धनवान और अलोकप्रिय बताया गया है। इसी प्रकार कर्टियस रूफस भी नंद शासक का वर्णन करते हुए उसकी विशाल सेना और शक्ति का उल्लेख करता है। प्लूटार्क के विवरण से भी यह संकेत मिलता है कि उस समय मगध का शासक अत्यंत शक्तिशाली और समृद्ध था। 

दूसरी ओर, “धनानंद” नाम हमें भारतीय स्रोतों जैसे पुराण, जैन ग्रंथों और बौद्ध ग्रंथों में मिलता है। इस प्रकार इतिहासकार यह मानते हैं कि यूनानी स्रोतों में वर्णित “Agrammes” या “Xandrames” वास्तव में वही शासक है इस आधार पर यह परिणाम  निकाला जाता है कि जोकि नामों में भिन्नता है, लेकिन सभी स्रोत एक ही शक्तिशाली और अत्यधिक धनवान नंद शासक की ओर इशारा करते हैं।

यह वंश हमारे प्राचीन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर रहा है। विशेष रूप से धनानंद के समय में यह साम्राज्य अपनी चरम शक्ति पर पहुँचा, लेकिन अत्यधिक कर वसूली और जनता में असंतोष के कारण अंततः इसका पतन हो गया।

अंततः चंद्रगुप्त मौर्य ने धनानंद को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, जिससे भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हुई।

हर्यक वंश (लगभग 544 ईसा पूर्व – 413 ईसा पूर्व)

और अधिक जानकारी के लिए wikipedia देखें।

Leave a Comment