हेलियोडोरस स्तंभ

हेलियोडोरस स्तंभ क्या है?

हेलियोडोरस स्तंभ शुंग काल का एक ऐतिहासिक स्तंभ है, जो लगभग 113 ईसा पूर्व (2nd century BCE) में बनवाया गया था।

भोपाल से लगभग 55–60 किमी दूर बेतवा और बेश नदियों के पास मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में, बेसनगर नामक स्थान पर स्थित है। इसे–

  • गरुड़ स्तंभ
  • Heliodorus Pillar
  • Besnagar Pillar

भी कहा जाता है। प्राचीन काल में विदिशा शुंगों का महत्वपूर्ण केंद्र व्यापारिक नगर, धार्मिक स्थल था। यहाँ से जुड़े प्रमुख स्थल सांची स्तूप और उदयगिरि गुफाएँ, हेलियोडोरस स्तंभ के आसपास में ही हैं।

इस स्तंभ को किसने बनवाया?

शुंग काल का हेलियोडोरस स्तंभ
Heliodorus Pillar, also known as the Garuda Pillar, standing tall in Vidisha. Image Courtesy: Archaeological Survey of India (ASI), Ministry of Culture, Government of India.

यह स्तंभ यूनानी राजदूत हेलियोडोरस ने बनवाया था। वह इंडो-ग्रीक राजा एंटियल्किडास का दूत था, जिसे शुंग राजा भागभद्र के दरबार में भेजा गया था।

लेकिन उसने यह स्तंभ क्यों बनवाया?

हेलियोडोरस जब भारत आया, तब वह यहाँ के धर्म संस्कृति

विशेषकर वासुदेव/विष्णु पूजा से प्रभावित हुआ। फिर उसने भगवान विष्णु(वासुदेव) के सम्मान में यह स्तंभ बनवाया।

हेलियोडोरस का महत्व क्या है?

यह स्तंभ इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि‐

1. भारत-यूनान संबंध का प्रमाण

यह दिखाता है कि शुंग काल में भारत और यूनानी शासकों के बीच राजनयिक संबंध थे।

  • दूत एक-दूसरे के दरबार में भेजे जाते थे

2. वैष्णव धर्म का प्रमाण

स्तंभ के लेख में लिखा है कि “यह गरुड़ ध्वज देवदेव वासुदेव के लिए हेलियोडोरस द्वारा स्थापित कराया गया।”

हेलियोडोरस खुद को “भगवत” यानी वासुदेव का भक्त बताता है

  • इससे पता चलता है कि उस समय विष्णु की पूजा और वैष्णव धर्म लोकप्रिय हो रहा था।

एक यूनानी व्यक्ति हमारे भारतीय धर्म से प्रभावित हुआ यह बहुत बड़ी बात मानी जाती है क्योंकि हेलियोडोरस विदेशी था फिर भी उसने वैष्णव धर्म अपनाया। 

3. इस स्तंभ की लिपि: ब्राह्मी लिपि 

इस पर प्राचीन ब्राह्मी लिपि में लेख लिखा गया है, जिससे इतिहासकारों को उस समय की भाषा और धर्म के बारे में जानकारी मिलती है।

वैसे तो ब्राह्मी लिपि के सबसे पुराने साक्ष्य की बात करें तो इस लिपि का प्रयोग 3री शताब्दी ईसा पूर्व अशोक के अभिलेख में हुआ था। लेकिन 113 BCE में भी ब्राह्मी लिपि इस्तेमाल हुई इससे पता चलता है कि शुंग काल तक ब्राह्मी लिपि लगातार प्रयोग में थी। 

स्तंभ पर क्या लिखा है?

इस स्तंभ के पहले भाग में, संक्षेप में लेख है जिसमें 

हेलियोडोरस विदेश से आया दूत था उसने ही इस स्तंभ को तुम्हारे लिए बनवाया। मतलब कि हेलियोडोरस का परिचय था किसने बनवाया, किसके लिए बनवाया, और किस समय बनवाया।

दूसरे भाग में एक छोटा धार्मिक संदेश लिखा है। जिसमें “अमरता” या अच्छे जीवन के 3 मार्ग बताए गए हैं–

  • दम → आत्मसंयम
  • दान/त्याग
  • सावधानी (अप्रमाद)

मतलब इंसान को अपने ऊपर नियंत्रण रखना चाहिए, दान करना चाहिए, सतर्क और धर्मपूर्ण जीवन जीना चाहिए

  • यह एक धार्मिक समर्पण स्तंभ था, अशोक के विशाल शिलालेख जैसा प्रशासनिक आदेश नहीं था। 

इस प्रकार हेलियोडोरस स्तंभ शुंग काल का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत माना जाता है। यह स्तंभ केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि उस समय के सांस्कृतिक आदान-प्रदान और धार्मिक प्रभाव का भी सबूत है। इसके अभिलेख इतिहासकारों को प्राचीन भारत के धर्म, समाज और विदेशी संबंधों को समझने में सहायता करते हैं। इसी कारण हेलियोडोरस स्तंभ भारतीय इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सांची स्तूप को विस्तार से समझिए।

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