वैदिक काल FAQs

नमस्कार दोस्तों इसके पहले हमने सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अच्छे से जाना था और आज हम जानने वाले है वैदिक काल के बारे में, वैसे जब बात RRB, SSC या अन्य competitive exams की हो, तो फैक्ट-आधारित तैयारी सबसे तेज़ और असरदार रहती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हमने यहाँ … Read more

चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथ | ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के आरण्यक

चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथ की जानकारी – AryaHistory.com

इस ब्लॉग में चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथों की पूरी जानकारी दी गई है — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के आरण्यक कौन-कौन से हैं और उनका महत्व क्या है, जानिए विस्तार से।

ब्राह्मण ग्रंथ: परिभाषा, सूची, भाषा, रचना काल | UPSC Notes in Hindi

ब्राह्मण ग्रंथ UPSC Notes in Hindi

ब्राह्मण ग्रंथ वेदों के मंत्रों के प्रयोग की विधि बताते हैं। इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि ब्राह्मण ग्रंथ क्या होते हैं, इनके नाम, रचना काल, भाषा और शैली कैसी होती है। साथ ही, हमने चारों वेदों के प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथों की पूरी सूची, उनका उद्देश्य और UPSC परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न भी दिए हैं। अगर आप प्राचीन भारतीय इतिहास या वैदिक साहित्य में गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए एक complete guide है।

वेदों का विभाजन कब, क्यों और कैसे हुआ???

वेदों का विभाजन – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद का प्रतीकात्मक चित्र

वेद हमारी संस्कृति की जड़ हैं, जो केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन, समाज और ज्ञान की धरोहर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वेदों का विभाजन कब, क्यों और कैसे हुआ? महर्षि वेदव्यास ने द्वापर युग के अंत और कलियुग की शुरुआत में वेदों को चार भागों में विभाजित किया—ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इसका कारण था वेदों की विशालता, जटिल यज्ञ-विधियाँ और लोगों की घटती स्मरण शक्ति। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि वेदों का संकलन कैसे हुआ, उनका मौखिक परंपरा से लिखित रूप तक का सफर कैसा रहा और इनका धार्मिक, सामाजिक तथा शैक्षिक महत्व क्या है।

वेदों की दुनिया: जानिए चारों वेदों का रहस्य और महत्व

चार वेदों का निर्माण और स्वरूप - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद

चार वेदों का निर्माण और स्वरूप जानिए – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की शाखाएं, रचनाकाल, विषय-वस्तु और बचे हुए ग्रंथों की संपूर्ण जानकारी।

ऋचा, सूक्त और संहिता – वैदिक साहित्य की नींव

संहिता और वेदों की पांडुलिपि - प्राचीन भारतीय इतिहास

संहिता वेदों का मूल हिस्सा हैं जिनमें मंत्र और ऋचाएँ संग्रहित हैं। इस ब्लॉग में हम संहिताओं का अर्थ, महत्व और भारतीय इतिहास में उनकी भूमिका को विस्तार से समझेंगे।

इतिहास के स्रोत – भाग 2 (प्राचीन भारत के सुराग)

पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्य

इंट्रो—

पिछली बार वाले ब्लॉग (भाग 1-  पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्य) में ये तो क्लियर हो गया था कि इतिहास सिर्फ दादी-नानी की कहानियाँ या पौराणिक चमत्कारों का पिटारा नहीं है। असली बात तो ये है कि इतिहास जैसा कुछ है, तो वो है सबूतों के दम पर – चाहे वो किताबों में छिपा हो या ज़मीन के नीचे। हमने वहाँ पर ये भी समझा था कि साहित्यिक और पुरातात्विक स्रोत कितने ज़रूरी हैं इतिहास को समझने के लिए।

अब इस बार (भाग 2) में थोड़ा और गहराई में चलते हैं – जैसे कि टीला आखिर है क्या बला, खुदाई-फुदाई होती कैसे है, साइंटिफिक टेस्टिंग का क्या रोल है, और कैसे सिक्के, ताम्रपत्र, शिलालेख या वेद-पुराण वगैरह हमें अपने इतिहास से जोड़ते हैं।

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इतिहास जानने के स्रोत: पुरातात्विक और साहित्यिक

इतिहास के स्रोत - पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्य | UPSC ब्लॉग

कभी आपने सोचा है कि हमें हमारे इतिहास के बारे में जानकारी मिली कैसे? आज जो कुछ भी हम इतिहास के बारे में पढ़ते हैं, उसकी जानकारी हमें कैसे मिली? सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक काल, गुप्त काल, मौर्य काल आदि की जानकारी हमारे इतिहासकारों को कैसे मिली? ये सब जानना हमारे लिए बेहद जरूरी है … Read more

प्राचीन भारतीय इतिहास : एक संक्षिप्त लेकिन सम्पूर्ण परिचय

प्राचीन भारतीय इतिहास का दृश्य जिसमें सिंधु घाटी, अशोक स्तंभ और वैदिक संस्कृति के प्रतीक दिखाए गए हैं।

प्राचीन भारतीय इतिहास भारत की समृद्ध सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक उत्थान-पतन की एक गाथा है। इस लेख में हड़प्पा, वैदिक काल, महाजनपद, मौर्य और गुप्त साम्राज्य से लेकर हर्षवर्धन तक की संक्षिप्त लेकिन सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।