पाषाण काल क्या है? | पाषाण काल के प्रकार, जीवन शैली और प्रमुख स्थल

आज हम सभी पाषाण काल को अच्छे से समझेंगे दोस्तों, हमने अपने पिछले ब्लॉग में मानव का उद्भव और विकास के बारे में जाना था। वहाँ हमने समझा कि प्रारंभिक मानव कैसे विकसित हुआ और पृथ्वी पर उसका अस्तित्व कैसे शुरू हुआ।

लेकिन अब हमारे मन में एक और सवाल आता है कि जब हम इस पृथ्वी पर आये तो हमारा जीवन कैसा था? हम कहाँ रहता थे, क्या खाते थे और अपने जीवन को चलाने के लिए किन साधनों का उपयोग करते थे।

इन सभी सवालों का उत्तर हमें पाषाण काल के अध्ययन से मिलता है। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों ने जब प्राचीन मानव के जीवन का अध्ययन किया तो उन्हें कई ऐसे प्रमाण मिले जिनसे पता चलता है कि उस समय मानव मुख्य रूप से पत्थर के औजारों का उपयोग करता था।

इसी कारण मानव इतिहास के इस प्रारंभिक काल को पाषाण काल (Stone Age) कहा जाता है। यह काल मानव सभ्यता के विकास का सबसे प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

पाषाण काल में मानव का जीवन बहुत ही सरल और प्रकृति पर निर्भर था। उस समय मानव शिकार करके, फल-फूल और कंद-मूल एकत्र करके अपना जीवन यापन करता था। धीरे-धीरे समय के साथ मानव ने औजार बनाना सीखा, आग की खोज की और अपने जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास किए।

  • यह काल लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व से शुरू होकर लगभग 3000 ईसा पूर्व तक माना जाता है।

पाषाण काल के बारे में हमें जो जानकारी मिलती है, वह मुख्य रूप से पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर मिलती है। जैसे—

  • पत्थर के औजार
  • गुफाओं के चित्र
  • हड्डियाँ
  • प्राचीन निवास स्थल

इन साक्ष्यों के माध्यम से इतिहासकारों ने यह समझने की कोशिश की है कि उस समय मानव का जीवन कैसा था। 

पाषाण काल का विभाजन

पाषाण काल का काल विभाजन सबसे पहले एक डेनमार्क के पुरातत्वविद् ने किया था। इस काल विभाजन को करने वाले विद्वान थे क्रिश्चियन जूर्गेनसेन थॉमसन(Christian Jurgensen Thomsen)। 

इन्होंने लगभग 1836 ई. में मानव इतिहास और पुरातात्विक वस्तुओं के अध्ययन के आधार पर एक प्रणाली प्रस्तुत की, जिसमें मानव इतिहास को तीन भागों में बाँटा गया है पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग। इसे ही Three Age System कहा जाता है।

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि पाषाण युग लंबी अवधि(25लाख वर्ष पूर्व- 3000 ईसा पूर्व) चला, इसलिए इतिहासकारों और पुरातत्वविदों ने इसे समझने के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया। 

सबसे पहले ब्रिटिश इतिहासकार John Lubbock ने 1865 ई. में अपनी पुस्तक Pre-Historic Times में पाषाण काल को दो भागों पुरापाषाण काल और नवपाषाण काल में विभाजित किया था। बाद में विद्वानों ने पाया कि इन दोनों कालों के बीच एक संक्रमणकाल भी था, इसलिए Hodder M. Westropp ने 1866 ई. के आसपास मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age) शब्द का प्रयोग किया।

इसके बाद से इतिहासकारों ने पाषाण काल को तीन भागों में विभाजित करके समझाना शुरू किया–

  • पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
  • मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
  • नवपाषाण काल(Neolithic Age)

पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)

तो दोस्तों पाषाण काल का सबसे शुरूआती स्थिति पुरापाषाण काल है। यह काल लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व से लगभग 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। उस समय मनुष्य के पास खेती या पशुपालन की कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए वह जंगलों और नदियों के आसपास घूमता रहता था और जहाँ भोजन मिलता था वहीं कुछ समय के लिए रुक जाता था। 

इतिहासकारों ने औजारों की बनावट और तकनीक के आधार पर पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया है—

  • निम्न पुरापाषाण काल (Lower Paleolithic Age)
  • मध्य पुरापाषाण काल (Middle Paleolithic Age)
  • उत्तर पुरापाषाण काल (Upper Paleolithic Age)
निम्न पुरापाषाण काल (Lower Paleolithic Age)

समय- लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व से 5 लाख वर्ष पूर्व तक।

प्रमुख स्थल- सोन घाटी (मध्य प्रदेश), बेलन घाटी (उत्तर प्रदेश), अत्तिरमपक्कम (तमिलनाडु)।

  • हाथ में पकड़ने योग्य बड़े-बड़े कच्चे औजार।
  • जीवन जंगलों और गुफाओं में।
  • आग का प्रयोग भी शायद इसी काल में शुरू हुआ।
मध्य पुरापाषाण काल (Middle Paleolithic Age)

समय : लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व से 50,000 ईसा पूर्व तक।

प्रमुख स्थल : भीमबेटका (म.प्र.), नर्मदा घाटी, नेवासा (महाराष्ट्र)

  • मध्य पुरापाषाण काल में मानव के औजार पहले की तुलना में अधिक छोटे और नुकीले बनने लगे।
  • शिकार करने के लिए बेहतर तकनीकें अपनाई गईं।
  • समाज में प्रारंभिक रूप से सहयोग की भावना दिखाई देती है 
पुरापाषाण काल के औजार
उत्तर पुरापाषाण काल (Upper Paleolithic Age)

समय- लगभग 50,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक।

प्रमुख स्थल- बेलन और सोन घाटी (उत्तर प्रदेश और बिहार), भीमबेटका गुफाएँ

  • ब्लेड जैसे पतले और धारदार औजार।
  • चित्रकला की शुरुआत (भीमबेटका की गुफाएँ)।
  • भोजन संग्रह में विविधता- शिकार के साथ-साथ मछली पकड़ना, फल, कंद इत्यादि।

मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)

पुरापाषाण काल के बाद मानव जीवन में धीरे-धीरे कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई देने लगे। इसी परिवर्तन के दौर को मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age) कहा जाता है। यह काल लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 8,000 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है।

इस समय मानव का जीवन पूरी तरह पुरापाषाण काल जैसा भी नहीं था और न ही अभी नवपाषाण जैसी पूरी स्थायी जीवन व्यवस्था भी विकसित हुई थी।

इस काल में मानव ने पत्थर के औजारों को पहले की तुलना में अधिक छोटा और नुकीला बनाना शुरू किया। इन छोटे पत्थर के औजारों को माइक्रोलिथ (Microliths) कहा जाता है। ये औजार तीर-कमान, भाले और अन्य उपकरणों में लगाए जाते थे, जिससे शिकार करना पहले की अपेक्षा अधिक आसान हो गया।

मध्यपाषाण काल में भी हमारा जीवन-निर्वाह अभी भी शिकार और भोजन संग्रह पर ही आधारित था। लोग जंगलों से फल-फूल, कंद-मूल और बीज इकट्ठा करते थे तथा जंगली जानवरों का शिकार करते थे। इसके साथ-साथ इस समय मछली पकड़ने की गतिविधि भी बढ़ने लगी थी, जिससे भोजन के नए स्रोत उपलब्ध हुए।

इस काल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी मानी जाती है कि मानव ने कुछ जानवरों को पालतू बनाना शुरू किया। माना जाता है कि कुत्ता सबसे पहला पालतू जानवर था, जिसे मानव ने इसी काल में अपने साथ रखना शुरू किया।

मध्यपाषाण काल में मानव छोटे-छोटे समूहों में रहता था। वह अभी पूरी तरह स्थायी जीवन नहीं जीता था, लेकिन कुछ स्थानों पर थोड़े लंबे समय तक रहने के संकेत मिलने लगे थे। इससे पता चलता है कि मानव धीरे-धीरे स्थायी जीवन की ओर बढ़ रहा था।

भारत में मध्यपाषाण काल के कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मिले हैं, जहाँ से पत्थर के छोटे औजार, हड्डियाँ और अन्य अवशेष प्राप्त हुए हैं। इनमें प्रमुख स्थल हैं—

  • बागोर (राजस्थान)
  • लंघनाज (गुजरात)
  • सराय नाहर राय (उत्तर प्रदेश)
  • महदहा (उत्तर प्रदेश)

इन स्थानों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर इतिहासकारों ने मध्यपाषाण काल के मानव जीवन और उसकी गतिविधियों को समझने का प्रयास किया है।


नवपाषाण काल (Neolithic Age)

पाषाण काल का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण नवपाषाण काल है। यह काल लगभग 8000 ईसा पूर्व से 3000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस समय मानव जीवन में बहुत बड़े परिवर्तन देखने को मिलते हैं, इसलिए इतिहासकार इस काल को मानव सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण मोड़ भी मानते हैं।

दोस्तों, अगर हम पहले के कालों यानी पुरापाषाण और मध्यपाषाण काल को देखें तो उस समय मानव मुख्य रूप से शिकार और भोजन संग्रह पर निर्भर था। लेकिन नवपाषाण काल में आकर मानव ने एक बहुत बड़ी खोज की कृषि (खेती)।

जब मानव ने खेती करना सीख लिया, तो उसे बार-बार जगह बदलने की जरूरत कम होने लगी। अब वह एक ही स्थान पर रहकर खेती करने लगा। इसी कारण इस काल में स्थायी जीवन (Permanent Settlement) की शुरुआत हुई और छोटे-छोटे गाँव बसने लगे।

नवपाषाण काल की एक और महत्वपूर्ण विशेषता पशुपालन की शुरुआत है। इस समय मानव ने कई जानवरों को पालतू बनाना शुरू किया, जैसे–

  • गाय
  • बकरी
  • भेड़
  • कुत्ता

इन जानवरों से मानव को दूध, मांस और अन्य उपयोगी चीजें मिलने लगीं।

इस काल में पत्थर के औजार पहले की तुलना में अधिक चिकने और विकसित बनने लगे। पहले के कालों में पत्थर के औजार सिर्फ तोड़कर बनाए जाते थे, लेकिन अब उन्हें घिसकर और चमकाकर बनाया जाने लगा। इसलिए इस काल को कभी-कभी पॉलिश्ड स्टोन एज (Polished Stone Age) भी कहा जाता है।

  • इसी काल में मानव ने मिट्टी के बर्तन बनाना भी सीख लिया। इन बर्तनों का उपयोग अनाज को संग्रह करने और भोजन पकाने के लिए किया जाता था।
  • और इसी समय कपड़े बनाना भी शुरू कर दिया था। पहले की तरह सिर्फ जानवरों की खाल का उपयोग नहीं किया जाता था, बल्कि धीरे-धीरे कपास और ऊन से बने वस्त्रों का भी उपयोग होने लगा।

समाज धीरे-धीरे संगठित होने लगा था। लोग समूहों में रहने लगे थे और आपस में सहयोग करने लगे थे। इससे सामाजिक जीवन का विकास भी शुरू हुआ।

हमारे देश में नवपाषाण काल के कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मिले हैं, जिनसे हमें उस समय के मानव जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। इनमें प्रमुख स्थल हैं—

  • मेहरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान)
  • बुरजाहोम (कश्मीर)
  • चिरांद (बिहार)
  • हल्लूर (कर्नाटक)

इन स्थानों से प्राप्त अवशेष बताते हैं कि इस समय हम ने कृषि, पशुपालन, बर्तन निर्माण और स्थायी जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर ली थी।

पाषाण काल से हमें क्या जानकारी मिलती है?

इस प्रकार पाषाण काल मानव इतिहास का सबसे प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण था। इसी काल में मानव ने पत्थर के औजार बनाना, आग का उपयोग करना और समूह में रहना सीखा। आगे चलकर नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई, जिससे स्थायी जीवन और सभ्यताओं के विकास की नींव पड़ी।

सिंधु घाटी सभ्यता (RRB NTPC / SSC / State Exams के लिए)

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