सांख्य दर्शन (Sankhya Darshan) – कपिल मुनि, प्रकृति–पुरुष सिद्धांत, त्रिगुण और मोक्ष | UPSC व छात्रों के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

सांख्य दर्शन – कपिल मुनि और प्रकृति–पुरुष सिद्धांत

दोस्तों, हमारी पिछली ब्लॉग में हमने न्याय दर्शन और वैशेषिक दर्शन को समझा था। अब उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज हम बात करेंगे सांख्य दर्शन की। यह भारतीय दर्शन की सबसे पुरानी और सबसे तार्किक परंपराओं में से एक है। सांख्य दर्शन किन सवालों का जवाब देता है? सांख्य दर्शन की सबसे बड़ी … Read more

वैशेषिक दर्शन– Atomic Theory

कणाद ऋषि द्वारा प्रतिपादित वैशेषिक दर्शन और परमाणुवाद सिद्धांत

वैशेषिक दर्शन भारतीय षड्दर्शन का एक प्रमुख भाग है, जिसे कणाद ऋषि ने प्रतिपादित किया। यह दर्शन “परमाणुवाद” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि पूरी सृष्टि सूक्ष्म और अविभाज्य परमाणुओं से बनी है। वैशेषिक दर्शन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता है बल्कि तर्क और यथार्थ पर आधारित विचार प्रस्तुत करता है। इस ब्लॉग में हमने इसके मूल सिद्धांत, कणाद ऋषि के विचार और आधुनिक विज्ञान से इसकी समानता को विस्तार से समझा है।

न्याय दर्शन – गौतम ऋषि का तर्क आधारित भारतीय दर्शन

न्याय दर्शन – गौतम ऋषि द्वारा प्रतिपादित भारतीय तर्कशास्त्र

न्याय दर्शन भारतीय दर्शन की एक प्रमुख शाखा है जिसकी रचना गौतम ऋषि ने की थी। इसमें प्रमाण, संदेह, प्रयोजन, दृष्टांत, तर्क, सिद्धांत जैसे 16 पदार्थों के माध्यम से सत्य तक पहुँचने का मार्ग बताया गया है। UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह दर्शन महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह तर्क, विवेक और ज्ञान की वैज्ञानिक परंपरा को समझने में मदद करता है।

🕉️ भारतीय दर्शन का सम्पूर्ण वर्गीकरण (सभी शाखाओं सहित)

भारतीय दर्शन की परंपरा में षड्दर्शन यानी छह आस्तिक दर्शन – न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा (वेदांत) – का बहुत बड़ा योगदान रहा है। ये दर्शन हमें सत्य, आत्मा, प्रकृति और मोक्ष की गहराई से पहचान कराते हैं। इस ब्लॉग में हमने इन्हें सरल और मानवीय भाषा में समझाया है।