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सिंधु घाटी सभ्यता (RRB NTPC / SSC / State Exams के लिए)
आज हम सभी मौर्य साम्राज्य(मौर्य वंश)बारे में पढने वाले हैं क्या आपको पता है “मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारत का पहला विशाल और संगठित साम्राज्य माना जाता है।”
comptative exams की बात करें तो ये chapters बहुत ही महत्वपूर्ण है रेलवे, SSC, GD, CHSL, CGL जैसी परीक्षाओं में मौर्य काल से सीधे 3–5 प्रश्न लगभग हर साल पूछे जाते हैं। इसलिए इसे तथ्य + समझ दोनों के साथ पढ़ना जरूरी है।
Contents
- 1 मौर्य साम्राज्य की स्थापना
- 2 मौर्य वंश के प्रमुख शासक
- 3 (1) चंद्रगुप्त मौर्य (322–298 ई.पू.)–
- 4 (2) बिंदुसार (298–273 ई.पू.)–
- 5 (3) अशोक महान (273–232 ई.पू.)–
- 6 मौर्य काल की प्रशासन व्यवस्था
- 7 केंद्रीय प्रशासन
- 8 प्रांतीय प्रशासन
- 9 नगर प्रशासन
- 10 मौर्य प्रशासन और आज का सिस्टम
- 11 मौर्य काल की अर्थव्यवस्था
- 12 मौर्य काल की सेना –
- 13 मौर्य कला और स्थापत्य
- 14 मौर्य साम्राज्य का पतन
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मौर्य साम्राज्य की स्थापना
देखो दोस्तों मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग 322ईसा पूर्व हुई थी इसके संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य जिनके बारे में आप सभी जानते होंगे। और इनके गुरु चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त) जी हैं। नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद को हराकर मौर्य साम्राज्य की शुरूवात हुई थी।
सेल्यूकस निकेटर सिकंदर का सेनापति था, जिसने सिकंदर की मृत्यु (323 ई.पू.) के बाद सेल्यूकिड वंश की स्थापना की। उसे चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 305 ई.पू. में पराजित किया।
मौर्य वंश के प्रमुख शासक
(1) चंद्रगुप्त मौर्य (322–298 ई.पू.)–
- राजधानी – पाटलिपुत्र
- यूनानी इतिहासकार –मेगस्थनीज
- पुस्तक– इंडिका
- शासन व्यवस्था मजबूत व केंद्रीकृत थी।
(2) बिंदुसार (298–273 ई.पू.)–
- उपनाम –अमित्रघात (शत्रुओं का नाश करने वाला)
- दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार
- यूनानी राजदूत– डाइमेकस
(3) अशोक महान (273–232 ई.पू.)–
- मौर्य साम्राज्य का सबसे महान शासक
- कलिंग युद्ध (261 ई.पू.)
- युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया
- नीति– धम्म नीति
मौर्य वंश में ये तीन ही शासक ज्यादा प्रभावशाली साबित हुए हैं अब चलिए इस वंश के सभी शासक को table के माध्यम से समझते हैं –
| शासक का नाम | शासन काल (ईसा पूर्व) | प्रमुख तथ्य (Exam Point) |
| चंद्रगुप्त मौर्य | 322 – 298 | मौर्य साम्राज्य का संस्थापक, चाणक्य का शिष्य |
| बिंदुसार | 298 – 273 | उपनाम – अमित्रघात, दक्षिण भारत तक विस्तार |
| अशोक महान | 273 – 232 | कलिंग युद्ध, धम्म नीति, बौद्ध धर्म |
| दशरथ मौर्य | 232 – 224 | अशोक का पोता, गुफा दान |
| समप्रति | 224 – 215 | जैन धर्म का संरक्षण |
| शालिशूक | 215 – 202 | कमजोर शासक, साम्राज्य में पतन |
| देववर्मन | 202 – 195 | बहुत कम जानकारी उपलब्ध |
| शतधन्वन | 195 – 187 | मौर्य साम्राज्य और कमजोर |
| बृहद्रथ | 187 – 185 | अंतिम मौर्य शासक, पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या |
अशोक के अभिलेख कुल 33 हैं, जिनमें शिलालेख और स्तंभलेख दोनों शामिल हैं।
1. कलिंग युद्ध का वर्णन किस शिलालेख में है?13वाँ प्रमुख शिलालेख
2.अशोक के अभिलेख किस भाषा/लिपि में हैं?
प्राकृत भाषा, ब्राह्मी लिपि
राष्ट्रीय चिह्न का स्रोत अशोक का सारनाथ स्तंभ है।
प्राचीन भारत में शिलालेख | Inscriptions in Ancient India full details
मौर्य काल की प्रशासन व्यवस्था
केंद्रीय प्रशासन
- राजा सर्वोच्च
- मंत्रिपरिषद सहायता करती थी
प्रांतीय प्रशासन
- साम्राज्य को प्रांतों में बाँटा गया
- प्रांताध्यक्ष – कुमार / आर्यपुत्र
नगर प्रशासन
मेगस्थनीज के अनुसार
- पाटलिपुत्र में 30 सदस्यीय नगर समिति
मौर्य प्रशासन और आज का सिस्टम
| मौर्य काल | आज का लोकतांत्रिक सिस्टम |
| राजा | प्रधानमंत्री + राष्ट्रपति (सर्वोच्च सत्ता) |
| मंत्रिपरिषद | कैबिनेट मंत्री / संसद में मंत्री |
| प्रांताध्यक्ष (कुमार/आर्यपुत्र) | मुख्यमंत्री / राज्यपाल |
| नगर समिति (30 सदस्यीय) | नगर निगम / विधायक / सांसद / ग्राम प्रधान जैसे स्थानीय प्रतिनिधि |
मौर्य काल की अर्थव्यवस्था
तो दोस्तों अब हम मौर्य काल के अर्थव्यवस्था को समझते हैं बिल्कुल Simple तरीके से
- कृषि– तो ये बात तो हम सभी जानते हैं कि पहले के समय में जीवन जीने के लिए कृषि ही एकमात्र कमाई का साधन था, जो कि आज के समय में भी बिना अनाज के हमारा जीवन असंभव-सा है। अब देखो खेती करने के जिन सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जैसे- सिंचाई व्यवस्था, नहरें, कुएँ, etc। तो राज्य(राजा) उन सभी जरूरतों को पूरा करता है अब कोई free में तो करेगा नहीं, तो भूमि कर (लगभग 1/6 उत्पादन) लिया जाता था।
- व्यापार कर- बाजार में सामान बेचने-खरीदने पर व्यापारी से लिया जाता था आज के GST जैसा समझ सकते हो।
- सीमा शुल्क (Custom Duty)- जब कोई व्यापारी एक राज्य से दूसरे राज्य या देश के बाहर सामान ले जाता था। तब यह कर लगता था आज के Import–Export Tax जैसा समझ लो।
- जंगल उत्पादों पर कर- लकड़ी, हाथी दाँत, शहद, औषधीय पौधे, जो जंगल से लिया जाए उस पर कर।
- शिल्प कर / उद्योग कर- जो लोग हथियार बनाते थे, आभूषण गढ़ते थे, कपड़ा बुनते थे, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी का काम करते थे उनसे उत्पादन या कमाई का एक हिस्सा राज्य को देना होता था। आज के Business Tax / GST जैसा समझो।
मौर्य काल की सेना –
सेना का स्वरूप
- मौर्य साम्राज्य की सेना हमारे प्राचीन भारत की सबसे संगठित सेना थी।
- इनमे मुख्यतः चार प्रकार की सेना थी- पैदल वाले सेना(Infantry), अश्वारोही (Cavalry), रथ (Chariots), हाथी (Elephants)।
- इसे चतुंगिनी सेना कहा जाता था।
मेगस्थनीज का विवरण: यूनानी यात्री मेगस्थनीज ने लिखा कि मौर्य सेना में लगभग
- 6 लाख पैदल सैनिक
- 30 हजार घुड़सवार
- 9 हजार हाथी
- 8 हजार रथ
यह उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक थी।
मौर्य कला और स्थापत्य
- स्तंभ कला – चमकदार पॉलिश
- गुफाएँ – बाराबर गुफाएँ
- पत्थर का प्रयोग पहली बार बड़े पैमाने पर
मौर्य कला की पहचान – पॉलिश युक्त पत्थर
मौर्य साम्राज्य का पतन
- अशोक के बाद कमजोर शासक
- विशाल साम्राज्य का नियंत्रण कठिन
- 185 ई.पू. – पुष्यमित्र शुंग द्वारा अंतिम मौर्य शासक की हत्या
तो दोस्तों मौर्य साम्राज्य समाप्त होकर अब यहां से शुंग वंश की शुरूवात हो जायगी।