ब्राह्मण ग्रंथ: परिभाषा, सूची, भाषा, रचना काल | UPSC Notes in Hindi

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ब्राह्मण ग्रंथ क्या होते हैं?

देखो, जब हम अपने वेदों की बात करते हैं, तो वो सिर्फ मंत्रों का ढेर नहीं हैं। ब्लकि वेदों में जितने भी मंत्र लिखे गए, उनका असली मतलब हमें तभी समझ आता है जब हमें पता चले कि इन्हें कहाँ और कैसे इस्तेमाल करना है।

  • अब सोचो, अगर आपके पास मंत्र हैं, लेकिन ये पता ही न हो कि किस यज्ञ में कौन-सा मंत्र बोलना है, तो पूरा काम ही  अधूरा रह जाएगा। यहीं काम आते हैं ब्राह्मण ग्रंथ।

सीधे शब्दों में कहें तो –

  • ब्राह्मण ग्रंथ वे ग्रंथ हैं जो वेद के मंत्रों के प्रयोग करने के  तरीके को बताते हैं।
  • इसमें लिखा होता है कि किस यज्ञ में कौन-सा मंत्र कब पढ़ना है, कौन-सी आहुति के समय है और पूजा-पाठ की सही विधि क्या होगी।
यानी कि अगर वेद ‘ज्ञान’ हैं, तो ब्राह्मण ग्रंथ उस ज्ञान को ‘कर्मों’ में बदलते हैं।

ब्राह्मण ग्रंथों की रचना का काल

देखो, जब हम ब्राह्मण ग्रंथों के बनने के समय की बात करते हैं, तो सबसे पहले यह समझ लो कि ये वेदों के बाद ही आए होंगे। 

  • सबसे पहले वेदों की संहिताएँ(मूल ग्रंथ) बनीं, जिनमें मंत्र और ऋचाएँ थीं। 
  • लेकिन इन मंत्रों का सही इस्तेमाल कैसे करना है, ये समझाने के वेदों के बाद ब्राह्मण ग्रंथ लिखे गए।

इतिहासकारों का मानना है कि इनकी रचना लगभग 1000 ईसा पूर्व से 700 ईसा पूर्व के बीच हुई और यही समय मध्य वैदिक काल भी कहलाता है।

  • वेद और ब्राम्हण ग्रंथ के बाद धीरे-धीरे आरण्यक और फिर उपनिषद भी लिखे गए।
संहिता → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद
वेद ब्राह्मण ग्रंथों के नाम अनुमानित रचना काल
ऋग्वेद ऐतरेय ब्राह्मण, कौषीतकि ब्राह्मण लगभग 900–800 ई.पू.
यजुर्वेद शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद), तैत्तिरीय ब्राह्मण (कृष्ण यजुर्वेद) लगभग 800–700 ई.पू.
सामवेद पंचविंश ब्राह्मण, षडविंश ब्राह्मण, जैमिनीय ब्राह्मण लगभग 800–600 ई.पू.
अथर्ववेद गोपथ ब्राह्मण लगभग 700–600 ई.पू.

ब्राह्मण ग्रंथों की भाषा और शैली

जब हम ब्राह्मण ग्रंथों को देखते हैं, तो पाते हैं कि ये वैदिक संस्कृत में लिखे गए हैं। यह वही भाषा है जिसमें वेदों की रचना हुई थी, लेकिन यहाँ की शैली(style) थोड़ी अलग दिखाई देती है।

  • संहिता भाग की भाषा छोटी, संक्षिप्त और काव्यात्मक (poetic) होती है, क्योंकि वहाँ केवल मंत्र और ऋचाएँ लिखी गई हैं।
  • ब्राह्मण ग्रंथों की भाषा इसके उलट ज्यादा व्याख्यात्मक (explanatory) और गद्यात्मक (prose) रूप में है। इसमें बातें सीधे और विस्तार से कही जाती हैं।

अगर हम इसकी शैली को समझें, तो यह वैसी है जैसे कोई शिक्षक अपने विद्यार्थी को धीरे-धीरे हर नियम और विधि समझा रहा हो—

  • किस यज्ञ में कौन-सा मंत्र पढ़ना है,
  • आहुति कब और कैसे देनी है,
  • किसी अनुष्ठान का असली अर्थ क्या है

इतना ही नहीं, ब्राह्मण ग्रंथों में कई कथाएँ और दंतकथाएँ (mythological stories) भी मिलती हैं। इन कहानियों का उद्देश्य यही था कि यज्ञ और अनुष्ठान की जटिल विधियाँ सरल लगें और आसानी से याद भी हो जाएँ।


वेदांग और ब्राह्मणों का अंतर

  • ब्राह्मण ग्रंथ हमें वेदों के मंत्रों को प्रयोग करने का तरीका बताते हैं। 
  • वहीं, हमारे वेदांग बाद की परंपरा से जुड़े ग्रंथ हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य वेदों को समझने और पढ़ने में मदद करना था।
ब्राह्मण ग्रंथ → वेदों का व्यवहारिक प्रयोग (यज्ञ-विधि और अर्थ)

वेदांग → वेदों को सीखने, समझने और व्यवस्थित करने की विधाएँ

चारों वेदों के महत्वपूर्ण ब्राह्मण ग्रंथ—

वेदों का विभाजन कब, क्यों और कैसे हुआ???

लौकिक साहित्य के बारे में जानते हो??

वेद ब्राह्मण ग्रंथ मुख्य उद्देश्य / विषय शाखा / अन्य जानकारी परीक्षा में संभावित प्रश्न
ऋग्वेद ऐतरेय ब्राह्मण यज्ञ-विधि, सोमयज्ञ, राजसूय यज्ञ, अनुष्ठानों का विवरण ऐतरेय शाखा “ऋग्वेद का ऐतरेय ब्राह्मण किस विषय पर केंद्रित है?”
ऋग्वेद कौषीतकी (शांकायन) ब्राह्मण देवताओं, यज्ञ, विश्व की उत्पत्ति, आख्यानात्मक शांकायन शाखा “कौषीतकी ब्राह्मण का मुख्य विषय क्या है?”
सामवेद पंचविंश (तांड्य) ब्राह्मण सामवेद के मंत्रों का गान, यज्ञ-विधि तांड्य शाखा “पंचविंश ब्राह्मण किस वेद से संबंधित है?”
सामवेद शड्विंश ब्राह्मण अतिरिक्त यज्ञ-विधि और सामगान तांड्य शाखा का परिशिष्ट “शड्विंश ब्राह्मण का विषय क्या है?”
सामवेद जैमिनीय ब्राह्मण यज्ञ-कथाएँ, आख्यानात्मक जैमिनीय शाखा “जैमिनीय ब्राह्मण में क्या विवरण मिलता है?”
सामवेद सामविधान ब्राह्मण सामवेद मंत्रों की पद्धति, स्वर-व्यवस्था “सामविधान ब्राह्मण का मुख्य उद्देश्य क्या है?”
सामवेद आर्षेय ब्राह्मण सामगान का क्रम और सूची कौथुम शाखा “आर्षेय ब्राह्मण और छान्दोग्य ब्राह्मण में अंतर क्या है?”
सामवेद छान्दोग्य ब्राह्मण (मंत्र ब्राह्मण) यज्ञ में प्रयुक्त मंत्र और उनका प्रयोग छान्दोग्य उपनिषद से जुड़ा
सामवेद देवतःधाय ब्राह्मण देवताओं को अर्पित कर्म और यज्ञ
सामवेद सम्न्यु ब्राह्मण अनुष्ठान विधियाँ, यज्ञ क्रम
सामवेद वंश ब्राह्मण गुरु-शिष्य परंपरा, यज्ञ संहिता
सामवेद श्रुतियजु ब्राह्मण यज्ञों और मंत्रों का विस्तृत विवरण
यजुर्वेद शतपथ ब्राह्मण यज्ञ-विधि, कर्मकाण्ड, दार्शनिक व्याख्या शुक्ल यजुर्वेद, माध्यन्दिन और काण्व शाखा “शतपथ ब्राह्मण किस शाखा से संबंधित है?”
यजुर्वेद तैत्तिरीय ब्राह्मण सोमयज्ञ, अग्निष्टोम यज्ञ, अनुष्ठान कृष्ण यजुर्वेद
यजुर्वेद मैत्रायणी ब्राह्मण यज्ञ-विधि और मंत्र प्रयोग कृष्ण यजुर्वेद
यजुर्वेद कठ ब्राह्मण यज्ञ और मंत्र कृष्ण यजुर्वेद
यजुर्वेद कपिष्ठल ब्राह्मण यज्ञ और अनुष्ठान कृष्ण यजुर्वेद
अथर्ववेद गोपथ ब्राह्मण यज्ञ, मंत्र प्रयोग, आध्यात्मिक विचार पूर्व और उत्तर खंड “अथर्ववेद का ब्राह्मण ग्रंथ कौन सा है?”

आरण्यक और उपनिषदों की ओर संक्रमण

ब्राह्मण ग्रंथों में यज्ञ और अनुष्ठानों का पूरा तरीका बताया गया है। धीरे-धीरे विद्वानों ने सिर्फ कर्म करने तक ध्यान नहीं दिया, बल्कि कर्मों के अंदर का अर्थ और ध्यान जानने की कोशिश की।

इससे जन्म हुए—
  • आरण्यक – जंगल में जाकर यज्ञ और कर्मों के गहरे रहस्य को समझना और ध्यान करना। ……इसे भी जाने
  • उपनिषद – आरण्यक के बाद, लोग आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष जैसे महत्वपूर्ण सवालों पर सोचने लगे।

End points —

  • ब्राह्मण ग्रंथों ने हमें ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के यज्ञ-विधि, अनुष्ठान और कर्मकाण्ड की पूरी जानकारी दी। 
  • हर वेद के अलग-अलग ब्राह्मण ग्रंथ हैं, जैसे ऐतरेय, कौषीतकी, पंचविंश, शट्पथ, गोपथ आदि।
  • इन ग्रंथों में यज्ञ का तरीका, मंत्रों का प्रयोग और देवताओं के लिए अनुष्ठान विस्तार से बताए गए हैं।
  • परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में शामिल हैं-
    • कौन सा ब्राह्मण किस वेद से संबंधित है?
    • किस ब्राह्मण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

💡Important Tip- चारों वेदों के बारे में अच्छे से जानिए

  • ब्राह्मण ग्रंथों की complete list + उद्देश्य + शाखा याद रखें।
  • ये ज्ञान आरण्यक और उपनिषदों की ओर जाने का आधार बनता है।

ब्राह्मण ग्रंथों की व्याख्या करने वाले प्रमुख स्रोत

स्रोत का नाम प्रकार उपयोगिता प्रकाशन वर्ष
मैक्समूलर (Max Müller) की Sacred Books of the East पश्चिमी विद्वान द्वारा संपादित ग्रंथों का संग्रह शतपथ ब्राह्मण, ऐतरेय ब्राह्मण आदि के अंग्रेज़ी अनुवाद 1879–1900
पं. सत्यव्रत समाश्रमी द्वारा शतपथ ब्राह्मण संस्कृत मूल पाठ + हिंदी व्याख्या यजुर्वेद के ब्राह्मण ग्रंथ की गहराई से व्याख्या 20वीं शताब्दी
डॉ. गौरीनाथ शास्त्री की वैदिक साहित्य का इतिहास शोध ग्रंथ ब्राह्मण ग्रंथों की रचना, शैली और उद्देश्य पर विश्लेषण 1960s–1970s
भारतीय विद्या संस्थान, वाराणसी द्वारा प्रकाशित संस्करण संस्थागत प्रकाशन मूल संस्कृत ग्रंथों के साथ टीका और संदर्भ वर्तमान संस्करण उपलब्ध
Rigveda Brahmana by Haug अंग्रेज़ी अनुवाद ऐतरेय ब्राह्मण का विश्लेषणात्मक अनुवाद 1860s
Vedic Index of Names and Subjects – Macdonell & Keith संदर्भ ग्रंथ ब्राह्मण ग्रंथों में आए विषयों और पात्रों की सूची 1912

B.C. , A.D. और शताब्दी क्या होता है कैसे पहचाने किस समय की बात हो रही है??

ब्राह्मण ग्रंथ क्या होते हैं?

ये ऐसे ग्रंथ हैं जो हमें बताते हैं कि वेदों में लिखे मंत्रों को यज्ञ और पूजा में कैसे इस्तेमाल किया जाए। यानी वेदों का ज्ञान सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे कर्म में बदलने का तरीका हमें यही ग्रंथ समझाते हैं।

ब्राह्मण ग्रंथों की रचना कब हुई थी?

इनकी रचना वेदों के बाद हुई, जब लोगों को यह जानने की ज़रूरत महसूस हुई कि मंत्रों का सही प्रयोग कैसे किया जाए। इतिहासकार मानते हैं कि ये ग्रंथ लगभग 1000 से 700 ईसा पूर्व के बीच लिखे गए।

क्या ब्राह्मण ग्रंथों के मूल संस्करण आज भी उपलब्ध हैं?

हाँ, कई ब्राह्मण ग्रंथ आज भी संस्कृत में उपलब्ध हैं। कुछ संस्थानों और डिजिटल लाइब्रेरीज़ में इनके मूल पाठ और टीकाएँ सुरक्षित हैं, जिन्हें पढ़कर इनका अध्ययन किया जा सकता है।

ब्राह्मण ग्रंथों की भाषा कैसी होती है?

इनकी भाषा वैदिक संस्कृत होती है, लेकिन शैली गद्यात्मक होती है। यानी इसमें बातें विस्तार से और समझाने वाले अंदाज़ में लिखी गई हैं, जैसे कोई शिक्षक नियम समझा रहा हो।

ब्राह्मण ग्रंथों में क्या जानकारी मिलती है?

इनमें बताया गया है कि किस यज्ञ में कौन-सा मंत्र पढ़ना है, आहुति कैसे देनी है, और पूजा-पाठ की विधि क्या होगी। साथ ही, कई कथाएँ भी मिलती हैं जो इन विधियों को याद रखने में मदद करती हैं।

ब्राह्मण ग्रंथ और वेदांग में क्या अंतर है?

ब्राह्मण ग्रंथ वेदों के मंत्रों को व्यवहार में लाने का तरीका बताते हैं, जबकि वेदांग वेदों को समझने और पढ़ने की तकनीकी विधियाँ सिखाते हैं — जैसे व्याकरण, छंद, ज्योतिष आदि।

ब्राह्मण ग्रंथों के बाद कौन-से ग्रंथ आए?

ब्राह्मण ग्रंथों के बाद आरण्यक और फिर उपनिषदों की रचना हुई। आरण्यक ध्यान और रहस्य की ओर ले जाते हैं, जबकि उपनिषद आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष जैसे गहरे सवालों पर विचार करते हैं।

ब्राह्मण ग्रंथों का अध्ययन क्यों ज़रूरी है?

क्योंकि ये ग्रंथ हमें वेदों के मंत्रों को सही तरीके से प्रयोग करने की विधि सिखाते हैं। इनके बिना वेदों का ज्ञान अधूरा रह जाता है — ये ज्ञान को कर्म में बदलने की कड़ी हैं।

ब्राह्मण ग्रंथों के अध्ययन के लिए कौन-कौन से प्रमाणिक स्रोत हैं?

Max Müller, सत्यव्रत समाश्रमी, गौरीनाथ शास्त्री जैसे विद्वानों ने इन ग्रंथों पर गहराई से काम किया है। इनके अलावा कई संस्थानों ने मूल संस्कृत पाठ और टीकाएँ प्रकाशित की हैं।

क्या ये ग्रंथ ऑनलाइन उपलब्ध हैं?

हाँ, कुछ ब्राह्मण ग्रंथ डिजिटल रूप में भी उपलब्ध हैं। जैसे Digital Library of India, Sanskrit Documents और GRETIL जैसी साइटों पर इन्हें पढ़ा या डाउनलोड किया जा सकता है।

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