Contents
- 1 Intro —
- 2 🕉️ ऋग्वेद (Rigveda)
- 3 रचनाकाल—
- 4 स्वरूप—
- 5 विषय-वस्तु—
- 6 शाखाएं (Shakhas)—
- 7 बची हुई vs लुप्त‐
- 8 अन्य ग्रंथ—
- 9 🔥 यजुर्वेद (Yajurveda)
- 10 रचनाकाल—
- 11 स्वरूप—
- 12 विषय-वस्तु—
- 13 शाखाएं (Shakhas)—
- 14 बची हुई शाखाएं—
- 15 अन्य ग्रंथ—
- 16 🎶 सामवेद (Samaveda)
- 17 रचनाकाल—
- 18 स्वरूप—
- 19 विषय-वस्तु—
- 20 शाखाएं (Shakhas)—
- 21 बची हुई शाखाएं—
- 22 अन्य ग्रंथ—
- 23 🧪 अथर्ववेद (Atharvaveda)
- 24 रचनाकाल—
- 25 स्वरूप—
- 26 विषय-वस्तु—
- 27 शाखाएं (Shakhas)—
- 28 बची हुई शाखा—
- 29 अन्य ग्रंथ—
- 30 वेदों का निर्माण किसने किया था?
- 31 ऋग्वेद में कितने सूक्त हैं?
- 32 यजुर्वेद की कितनी शाखाएँ बची हुई हैं?
- 33 सामवेद की खासियत क्या है?
- 34 अथर्ववेद को किस नाम से भी जाना जाता है?
- 35 आज कौन-कौन सी शाखाएँ पूरी तरह जीवित हैं?
- 36 Like this:
Intro —
हमारे देश की प्राचीन परंपराओं में चार वेदों का खास स्थान है – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
हर वेद का अपना अलग ही महत्व है है-
- कोई देवताओं की प्रशंसा करता है,
- कोई यज्ञ की विधि को बताता है,
- कोई संगीत और मंत्रों को जोड़ता है,
- तो कोई घरेलू जीवन और रहस्यमयी ज्ञान के बारे में बताने लगता है।
आज इस ब्लॉग में हम इन चारों वेदों की रचना, उनका रूप, विषय, शाखाएं और उनसे जुड़े अन्य ग्रंथों को बहुत ही आसान भाषा में बताने वाले हैं
अगर आपको भारतीय संस्कृति, पुरानी परंपराएं या अपने पूर्वजों की सोच में दिलचस्पी है, तो यह लेख खासकर आपके लिए ही है — B.C. और A.D. क्या है??
Rigveda – 1500–1000 BCE
Samaveda, Yajurveda, Atharvaveda – 1200–800 BCE (लगभग)
🕉️ ऋग्वेद (Rigveda)
रचनाकाल—
- लगभग 1500–1000 BCE के बीच रचा गया।
- यह सबसे पुराना वेद है और दुनिया की सबसे पुरानी धार्मिक किताबों में से एक मानी जाती है।
स्वरूप—
- इसमें 10 मंडल (अध्याय) हैं।
- कुल 1028 सूक्त (हिम्न्स) और लगभग 10,600 मंत्र हैं।
- ये मंत्र देवताओं की स्तुति में हैं — जैसे अग्नि, इंद्र, वरुण, सोम आदि।
- इसमें यज्ञ, ब्रह्मांड की उत्पत्ति, जीवन के रहस्य और दार्शनिक विचार भी मिलते हैं।
विषय-वस्तु—
- देवताओं की स्तुति और यज्ञों की विधि।
- ब्रह्मांड की रचना, प्रकृति के तत्वों की महिमा।
- समाज में दान, धर्म, सत्य जैसे मूल्यों की चर्चा।
- नासदीय सूक्त (ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर)
- पुरुष सूक्त (समाज की वर्ण व्यवस्था की व्याख्या पर)
शाखाएं (Shakhas)—
महर्षि पतंजलि ने अपने महाभाष्य में लिखा है,
“एकविंशतिधा बाह्वच्यम्” — यानी ऋग्वेद की 21 शाखाएं थीं।
लेकिन बाद में शौनक द्वारा रचित चरणव्यूह नामक ग्रंथ में केवल 5 शाखाओं का उल्लेख मिलता है–
1. शाकल
2. बाष्कल
3. आश्वलायन
4. शांखायन
5. मांडूकायन
यानी 21 शाखाएं थीं, लेकिन इतिहास के प्रवाह में उनमें से केवल 5 शाखाएं मुख्य रूप से पहचानी गईं और शास्त्रों में दर्ज हुईं।
इन 5 में से भी केवल शाकल शाखा ही आज पूरी तरह जीवित है — यानी इसकी संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद आदि उपलब्ध हैं।
बाकी शाखाओं के कुछ अंश या सूत्र मिलते हैं, लेकिन पूरी शाखा नहीं।
बची हुई vs लुप्त‐
शाकल (पूरी तरह जीवित)
बाष्कल (कुछ सूक्त जैसे खिला सूक्त उपलब्ध)
बाकी सिर्फ नाम मात्र।
अन्य ग्रंथ—
इसके साथ जुड़े ग्रंथ हैं-
ब्राह्मण- ऐतरेय ब्राह्मण
आरण्यक- ऐतरेय आरण्यक
उपनिषद- ऐतरेय उपनिषद
🔥 यजुर्वेद (Yajurveda)
रचनाकाल—
लगभग 1200–800 BCE के बीच रचा गया।
यह वेद यज्ञों की विधियों और कर्मकांडों से जुड़ा है।
स्वरूप—
- इसमें गद्य और पद्य दोनों मिलते हैं।
- इसमें यज्ञों में बोले जाने वाले मंत्र और उनके साथ की जाने वाली क्रियाएं शामिल हैं।
दो मुख्य प्रकार हैं…
1. कृष्ण यजुर्वेद – मंत्र और व्याख्या मिली-जुली होती है।
2. शुक्ल यजुर्वेद – मंत्र अलग होते हैं और व्याख्या अलग ग्रंथों में।
विषय-वस्तु—
- यज्ञों की विधि, हवन, आहुति देने के नियम।
- कर्मकांड, ब्रह्मांड की संरचना, देवताओं की पूजा।
- समाज में धर्म, कर्तव्य और जीवन के नियम।
शाखाएं (Shakhas)—
यजुर्वेद की कुल 101 शाखाएं थीं।
इनमें से कुछ प्रमुख शाखाएं–
शुक्ल यजुर्वेद- माध्यंदिन, कान्व
कृष्ण यजुर्वेद- तैत्तिरीय, मैत्रायणी, कठ, कपिष्ठल
बची हुई शाखाएं—
आज माध्यंदिन, कान्व (शुक्ल यजुर्वेद) और तैत्तिरीय (कृष्ण यजुर्वेद) शाखाएं जीवित हैं।
अन्य ग्रंथ—
- ब्राह्मण- शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद), तैत्तिरीय ब्राह्मण (कृष्ण यजुर्वेद)
- आरण्यक‐ तैत्तिरीय आरण्यक …..इसे भी जाने
- उपनिषद- ईश, तैत्तिरीय, कठ, ब्रहदारण्यक उपनिषद
अब चलते हैं सामवेद की ओर — जो संगीत और स्वर का वेद है।
🎶 सामवेद (Samaveda)
रचनाकाल—
लगभग 1200–800 BCE के बीच रचा गया।
यह वेद संगीत और स्वर आधारित है — यज्ञों में गाए जाने वाले मंत्रों का संग्रह।
स्वरूप—
- इसमें लगभग 1875 मंत्र हैं।
- इनमें से ज्यादातर मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, लेकिन इन्हें गाने के लिए स्वरबद्ध किया गया है।
- इसमें संगीत की विधियाँ और स्वर की संरचना शामिल है।
विषय-वस्तु—
- यज्ञों में गाए जाने वाले मंत्र।
- संगीत, स्वर, ताल और लय की जानकारी।
- देवताओं की स्तुति को गान के रूप में प्रस्तुत करना।
शाखाएं (Shakhas)—
सामवेद की लगभग 1000 शाखाएं थीं।
प्रमुख शाखाएं-
1. कौथुम
2. जैमिनीय
3. रणायणीय
4. तालव
बची हुई शाखाएं—
आज कौथुम और जैमिनीय शाखाएं ही जीवित हैं।
अन्य ग्रंथ—
- ब्राह्मण- पंचविंश ब्राह्मण, शड्विंश ब्राह्मण, जैमिनीय ब्राह्मण
- आरण्यक- छांदोग्य आरण्यक
- उपनिषद- छांदोग्य उपनिषद, केन उपनिषद
अब अंत में आता है अथर्ववेद — जो रहस्य, तंत्र और घरेलू जीवन से जुड़ा है।
🧪 अथर्ववेद (Atharvaveda)
रचनाकाल—
- लगभग 1200–900 BCE के बीच रचा गया।
- यह वेद बाकी तीनों से अलग है — इसमें तंत्र, चिकित्सा, घरेलू जीवन और रहस्यवाद की बातें हैं।
स्वरूप—
- इसमें 20 कांड, 730 सूक्त, और लगभग 6000 मंत्र हैं।
- इसमें जादू-टोना, रोगों की चिकित्सा, घरेलू उपाय, तंत्र-मंत्र आदि की जानकारी है।
विषय-वस्तु—
- रोगों से बचाव, औषधियों का प्रयोग।
- तंत्र, मंत्र, टोने-टोटके।
- गृहस्थ जीवन, विवाह, संतान, समाज के नियम।
शाखाएं (Shakhas)—
अथर्ववेद की कुल 9 शाखाएं थीं।
प्रमुख शाखाएं….
1. शौनक
2. पैप्पलाद
3. ब्रह्मवाद
4. चारण
5. स्तौद
बची हुई शाखा—
आज केवल शौनक शाखा ही जीवित है।
अन्य ग्रंथ—
- ब्राह्मण- गोपथ ब्राह्मण
- उपनिषद- मुण्डक, माण्डूक्य, प्राश्न उपनिषद
इतिहास को लिखने मे किन-किन स्रोतों का उपयोग किया गया है??
बिलकुल सही पकड़ा तुमने! 👏
अथर्ववेद के बारे में एक खास बात यही है — इसके साथ कोई आरण्यक ग्रंथ नहीं जुड़ा है।
🤔 क्यों नहीं है आरण्यक?
आरण्यक ग्रंथ आमतौर पर उन वेदों के साथ जुड़े होते हैं जिनका संबंध यज्ञ और वनवास जीवन से होता है — जैसे ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद।
लेकिन अथर्ववेद का फोकस यज्ञ नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन, चिकित्सा, तंत्र-मंत्र, और सामाजिक व्यवहार पर है।
इसलिए इसमें वन में जाकर चिंतन करने वाले विषय नहीं हैं — जो कि आरण्यक ग्रंथों का मुख्य उद्देश्य होता है।
वेद हमें सिखाते हैं कि जीवन सिर्फ जीने की चीज़ नहीं ब्लकि समझने और महसूस करने वाली चीजें हैं।
वेदों में छिपा है जीवन का ज्ञान,
हर मंत्र देता है सच्चा पहचान।
सदियों से जोत रहे हैं ये दीप,
संस्कृति की जड़ें, हैं ये अनमोल बीज।
THANKYOU
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वेदों का निर्माण किसने किया था?
परंपरा के अनुसार वेदव्यास ने वेदों का संकलन और विभाजन किया। लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से यह एक लंबी मौखिक परंपरा के परिणामस्वरूप हुआ।
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ऋग्वेद में कितने सूक्त हैं?
ऋग्वेद में कुल 1028 सूक्त और लगभग 10,600 मंत्र हैं।
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यजुर्वेद की कितनी शाखाएँ बची हुई हैं?
यजुर्वेद की 101 शाखाओं में से आज केवल 3 प्रमुख शाखाएँ जीवित हैं— माध्यंदिन, कान्व और तैत्तिरीय।
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सामवेद की खासियत क्या है?
सामवेद संगीत और स्वर का वेद है। इसके अधिकतर मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, जिन्हें स्वरबद्ध करके गाया जाता है।
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अथर्ववेद को किस नाम से भी जाना जाता है?
अथर्ववेद को ‘जादू-टोना और घरेलू जीवन का वेद’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें औषधि, तंत्र-मंत्र और घरेलू अनुष्ठानों का उल्लेख है।
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आज कौन-कौन सी शाखाएँ पूरी तरह जीवित हैं?
ऋग्वेद की शाकल, यजुर्वेद की माध्यंदिन/कान्व/तैत्तिरीय, सामवेद की कौथुम और जैमिनीय, तथा अथर्ववेद की शौनक शाखा।