नमस्कार दोस्तों, आज हम आप सभी को Timeline और calender के बारे में बताने वाले हैं जो कि हम सभी इसका उपयोग करते हैं तो इसके इतिहास के बारे में भी जानना चाहिए। क्या आपने कभी सोचा है कि कैलेंडर बनते कैसे है (सुरु कैसे होते हैं), आज हम इन सभी चीजों को अच्छे से समझेंगे।
अब सोचो, आज हम 2026 में जी रहे हैं। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि इतिहास भी सिर्फ 2026 साल ही पुराना है??? नहीं न! ये सिर्फ एक कालक्रम का point है, जो हमें बताता है कि ईसा मसीह के जन्म के बाद 2026 साल हो गए हैं। तो उसके पहले का क्या ??
अब अगर हम archaeological evidence देखें, तो हमें ऐसी ऐसी चीजें मिलती हैं जो 2000 साल, 5000 साल, यहां तक कि 2 लाख साल पहले की मानव सभ्यता और उनके विकास, उनके रहन-सहन की कहानी बताते हैं।
मतलब कि, 2025 सिर्फ एक रजिस्ट्रेशन नंबर की तरह है
(असली गाड़ी तो बहुत पहले से चल रही थी।)
Contents
- 1 2026 से समझते हैं, B.C और A.D.–
- 2 हमारे लिए इतिहास में कालक्रम क्यों ज़रूरी है?
- 3 Timeline बनाई कैसे जाती है?
- 4 अब बात करते हैं कैलेंडर की
- 5 ग्रेगोरियन कैलेंडर –
- 6 शक संवत –
- 7 शक संवत की शुरुआत किसने की?
- 8 विक्रम संवत–
- 9 विक्रम संवत की शुरुआत क्यों हुई?
- 10 इस्लामी कैलेंडर (हिजरी कैलेंडर)
- 11 हिब्रू कैलेंडर (Jewish Calendar)
- 12 चीनी कैलेंडर (Chinese Calendar)
- 13 इथियोपियन कैलेंडर (Ethiopian Calendar)
- 14 बौद्ध कैलेंडर
- 15 अगर आपने यहां तक पढ़ लिया है तो आपके मन में ये सवाल तो जरूर उठा होगा क्या सभी Calendar के पीछे BC/AD लगाते हैं??
- 16 शताब्दी क्या है?
- 17 Like this:
2026 से समझते हैं, B.C और A.D.–
तो मान लो 2026 एक समय है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सब कुछ यहीं से शुरू हुआ। इसके पीछे भी काफी चीजें हुई हैं जो हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।
अगर कोई कहे कि अभी 2026 चल रहा है, तो हमें ये समझना चाहिए कि ये सिर्फ ईसा मसीह के जन्म से गिने गए सालों की गिनती है
(ईसा मसीह का जन्म 1, 2, 3, … 2026)।
सही मायने में तो हम इंसानों की कहानी इससे कहीं ज़्यादा पुरानी है।
A.D. = Anno Domini (ईसा के बाद)
B.C. = Before Christ (ईसा से पहले)
- जैसे 100 B.C. का मतलब हुआ – ईसा से 100 साल पहले (ईसा पूर्व)
- और 2025 A.D. का मतलब हुआ – ईसा से 2025 साल बाद (ईस्वी)
हमारे लिए इतिहास में कालक्रम क्यों ज़रूरी है?
मान लो तुम्हें कहा जाए कि पता करो अशोक सम्राट पहले हुए या अकबर? तो तुम दोनों की तुलना कैसे करोगे? Timeline से ही हमें ये समझ आता है कि –
- कौन पहले हुआ, कौन बाद में?
- कौन-सी सभ्यता किसके बाद आई?
- किस घटना के बाद कौन-सी दूसरी घटना घटी?
- समय के साथ मानव समाज का विकास कैसे हुआ?
Timeline बनाई कैसे जाती है?
पुरातत्व से मिले अवशेषों से सिक्के, हड्डियाँ, मूर्तियाँ, शिलालेख की कार्बन डेटिंग से चीज़ों की उम्र पता लगाई जाती है कि वह कितनी पुरानी है। विदेशी यात्रियों की किताबें भी समय को समझने में मदद करती हैं।
अब बात करते हैं कैलेंडर की
बहोत से CALENDER के बारे मे आप सभी ने सुना होगा, और सभी के हिसाब से अलग अलग साल चल रहे हैं तो चलिए आज कुछ महत्तवपूर्ण कैलेंडर के बारे में जानें, कि वो कब सुरु हुए और क्यूँ –
ग्रेगोरियन कैलेंडर –
लगभग पूरी दुनिया में इस कैलेंडर का उपयोग होता है। आज जो हम सब जनवरी, फरवरी, मार्च… ऐसे 12 महीने देखते हैं, वो इसी कैलेंडर से आते हैं। इसमें साल की शुरुआत जनवरी से होती है और दिसंबर पर खत्म होती है। यह कैलेंडर ईसा मसीह के जन्म के हिसाब से चलता है।
- AD/ CE= Anno Domini (ईसा के बाद)
BC/ BCE = Before Christ (ईसा से पहले)
शक संवत –
शक संवत की शुरुआत 78 ईस्वी (AD 78) में हुई है। इस समय शक शासकों ने उत्तर-पश्चिम भारत में अपनी सत्ता मजबूत की, उसी घटना को आधार मानकर शक संवत की गणना शुरू की गई। इसका आधार सूर्य है (सूर्य की गति पर आधारित है, न कि चंद्रमा पर)।
- भारत सरकार के सरकारी दस्तावेज़ों में शक संवत को भी मान्यता मिली है। इसमें महीनों के नाम जैसे– चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद (भादों), आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष (अग्रहायण), पौष, माघ, फाल्गुन आदि होते हैं। ये लोकल कल्चर और ज्योतिष के आधार पर बने हैं।
शक संवत की शुरुआत किसने की?
इस विषय पर इतिहासकारों में मतभेद हैं- कुछ विद्वान इसे शक शासकों से जोड़ते हैं, कुछ इसे कनिष्क (कुषाण शासक) से भी जोड़ते हैं
विक्रम संवत–
57 ईसा पूर्व (57 BCE) से विक्रम संवत की शुरुआत मानी जाती है। इसका आधार चंद्रमा(Lunar / Luni-solar) है महीने चंद्रमा की गति पर आधारित तिथियाँ हर साल बदलती रहती हैं इस कैलेंडर के हिसाब से अभी–
- 2026 ईस्वी ≈ 2082–83 विक्रम संवत (लगभग) चल रहा है।
- इसके महीनों के नाम शक संवत के जैसे ही हैं
विक्रम संवत की शुरुआत क्यों हुई?
उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय के उपलक्ष्य में विक्रम संवत शुरू किया।
इस्लामी कैलेंडर (हिजरी कैलेंडर)
622 ई. में पैग़म्बर मुहम्मद साहब ने मक्का से मदीना की यात्रा की, इस घटना को हिजरत कहा जाता है इसी ऐतिहासिक घटना से हिजरी संवत (Islamic Era) की शुरुआत मानी जाती है। इसमे 12 महीने क्रमशः इस प्रकार हैं- मुहर्रम, सफर, रबी-उल-अव्वल, रबी-उस-सानी, जमादि-उल-अव्वल, जमादि-उस-सानी, रजब, शाबान, रमजान, शव्वाल, जिल-कादा, जिल-हिज्जा
- यह कैलेंडर पूरी तरह चंद्रमा की गति पर आधारित है इसका हर महीना 29 या 30 दिन का होता है और नया महीना चाँद दिखने से शुरू होता है।
- इसमे महीनों की तारीखें हर साल लगभग 10–11 दिन आगे खिसक जाती हैं। सामान्य वर्ष 354 दिन, अधिवर्ष (Leap Year) 355 दिन का होता है।
- इस कैलेंडर का उपयोग लगभग सभी इस्लामीक देशों में मुस्लमानो के त्योहारों को देखने के लिए किया जाता है।
तो जैसा कि ये 4 कैलेंडर हमारे देश से रिलेटेड है तो इनके बारे में हम अच्छे से समझ लिये हैं अब हम और भी बाकी कैलेंडर को normaly check कर लेते हैं।
हिब्रू कैलेंडर (Jewish Calendar)
तो दोस्तों यहूदी मान्यता के अनुसार सृष्टि की रचना 3761 ईसा पूर्व (BC) हुई थी और इसी समय से इस कैलेंडर की शुरूवात हुई है। इसका आधार चंद्र–सौर (Luni-Solar) है मतलब महीने चंद्रमा से, साल सूर्य से संतुलित करके बनाया जाता है।
- सामान्य वर्ष 353–355 दिन, अधिवर्ष 383–385 दिन, 19 साल के चक्र में 7 अधिवर्ष (अधिमास/Extra Month जोड़ा जाता है)
- इसके महीनों के नाम निसान, इयार, सिवान, तम्मूज, आव, एलुल, तिशरी, चेश्वान, किसलेव, तेवेत, शेवत, अदार (अधिवर्ष में अदार-I और अदार-II)
चीनी कैलेंडर (Chinese Calendar)
दोस्तों चीनी कैलेंडर की शुरूवात लगभग 2637ईसा पूर्व से मानी जाती है। इसे दुनिया के सबसे पुराने प्रचलित कैलेंडरों में गिना जाता है। यह कैलेंडर भी चंद्र–सौर (Luni-Solar) को आधार बनाकर बनाया जाता है। सामान्य वर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं जब चंद्र और सौर वर्ष में अंतर बढ़ जाता है, तब अधिवर्ष (Leap Year) में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है
- इसमे एक अलग चीज देखने को मिलता है महीनों के नाम, सब normal ही पहला महीना, दूसरा महीना…….
- लेकिन साल को 12 पशुओं का चक्र, जिसे Zodiac कहते हैं। 12 चक्र क्रमशः चूहा, बैल, बाघ, खरगोश, ड्रैगन, साँप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता, सुअर ये सभी पूरे 1, 1 साल चलते हैं जैसे चूहा 1 साल तक, फिर बैल 1 साल तक…..
- इसके साथ साथ 5 तत्व भी चलते हैं लकड़ी (Wood), अग्नि (Fire), पृथ्वी (Earth), धातु (Metal), जल (Water) लेकिन ये तत्व 2 साल तक रहते हैं जैसे – चूहे के साथ लकड़ी, और फिर बैल के साथ भी लकड़ी ही, और 2 सालों के साथ Fire ऐसे ही और बाकी
- अगर आपकी math थोड़ी सी भी सही है तो आप समझ चुके होंगे कि 60 साल बाद फिर से वही क्रम सुरु हो जायगा, इस तरह पूरा चक्र 60 वर्षों में पूरा होता है।
- चीन, ताइवान, कोरिया, वियतनाम (परंपरागत उपयोग)
इथियोपियन कैलेंडर (Ethiopian Calendar)
ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 7–8 साल पीछे से इसकी शुरुआत मानी जाती है
- इसका आधार भी– सौर (Solar Calendar)
- 365 दिन, लीप ईयर में 366 दिन
- इसमे महीने 30 – 30 दिन के होते और आखिरी महीना 6/7 दिन का हो जाता है
बौद्ध कैलेंडर
तो अब बौद्ध calender की शुरूवात भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण/मृत्यु को आधार मानकर 543 ईसा पूर्व (BCE) से इस कैलेंडर की शुरूवात मानी जाती है।
- इस कैलेंडर का उपयोग बौद्ध देशों में (थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस) धार्मिक कार्यो के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ बौद्ध देशों में सरकारी कैलेंडर के रूप में भी अपनाया गया है।
- इसमे महीने चंद्रमा की कलाओं (अमावस्या–पूर्णिमा) से तय होते हैं, तारीख चंद्र गति पर आधारित होती हैं, इसलिए हर साल तिथियाँ थोड़ी आगे–पीछे होती रहती हैं
- कुछ देशों (जैसे थाईलैंड) में इसे सूर्य वर्ष के साथ संतुलित (Luni–Solar) भी किया गया है।
अगर आपने यहां तक पढ़ लिया है तो आपके मन में ये सवाल तो जरूर उठा होगा क्या सभी Calendar के पीछे BC/AD लगाते हैं??
BC/AD सिर्फ ईसाई (Christian) या ग्रेगोरियन कैलेंडर से जुड़ा हुआ सिस्टम है। हर सभ्यता ने समय गिनने का अपना अलग आधार चुना है। जैसे –
- शक संवत 1946, शक 1946
- विक्रम संवत या वि. सं.
- AH ‐ Anno Hijri
शताब्दी क्या है?
जब भी हम इतिहास पढ़ते हैं या समय की बात करते हैं, तो “शताब्दी” शब्द बार-बार सुनने को मिलता है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि शताब्दी होती क्या है?
शताब्दी का अर्थ होता है 100 वर्ष। यानि जब हम कहते हैं 21वीं शताब्दी, तो हम सन् 2001 से 2100 तक की बात कर रहे होते हैं।
इतिहास को समझने के लिए समय को शताब्दियों में बाँटना बहुत ज़रूरी है। इससे हमें पता चलता है कि किस दौर में कौन-सी घटनाएँ हुईं, समाज कैसा था और लोगों की सोच किस दिशा में जा रही थी। अगर हम हर चीज़ साल-साल में गिनने लगें, तो समझना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन जब हम कहते हैं –
“19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन फैल रहा था”
तो बात एकदम साफ हो जाती है। इसलिए इतिहास को हमेशा शताब्दियों के नज़रिए से समझना चाहिए। तो अगली बार जब कोई पूछे कि “शताब्दी क्या होती है?” तो तुम आराम से कह सकते हो कि ये सिर्फ 100 साल नहीं, बल्कि समाज और सभ्यता का पूरा अध्याय होती है।
17वीं शताब्दी – 1601 से 1700
18वीं शताब्दी – 1701 से 1800
Math के formule के रूप से देखो तो (n−1)×100 + 1 से n×100 तक
…
इतिहास को सही से समझना है तो कालक्रम को समझना बहोत ज्यादा जरूरी है। तभी तो पता चलेगा कि हम कहां से आए हैं और कहां तक पहुंचे हैं। आगे कहाँ जाना ठीक रहेगा और भी बहुत कुछ….