चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथ | ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के आरण्यक
इस ब्लॉग में चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथों की पूरी जानकारी दी गई है — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के आरण्यक कौन-कौन से हैं और उनका महत्व क्या है, जानिए विस्तार से।
इस ब्लॉग में चारों वेदों के आरण्यक ग्रंथों की पूरी जानकारी दी गई है — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के आरण्यक कौन-कौन से हैं और उनका महत्व क्या है, जानिए विस्तार से।
वेद हमारी संस्कृति की जड़ हैं, जो केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन, समाज और ज्ञान की धरोहर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वेदों का विभाजन कब, क्यों और कैसे हुआ? महर्षि वेदव्यास ने द्वापर युग के अंत और कलियुग की शुरुआत में वेदों को चार भागों में विभाजित किया—ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इसका कारण था वेदों की विशालता, जटिल यज्ञ-विधियाँ और लोगों की घटती स्मरण शक्ति। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि वेदों का संकलन कैसे हुआ, उनका मौखिक परंपरा से लिखित रूप तक का सफर कैसा रहा और इनका धार्मिक, सामाजिक तथा शैक्षिक महत्व क्या है।