🕉️ भारतीय दर्शन का सम्पूर्ण वर्गीकरण (सभी शाखाओं सहित)

हमारे भारतीय दर्शन की खूबसूरती ही यही है कि यहाँ सिर्फ पूजा-पाठ की बातें नहीं होतीं, बल्कि यह भी सिखाया जाता है कि जीवन को कैसे जिया जाए, सच्चाई क्या है और उसे समझने का सही तरीका कौन-सा है।

इन दर्शनों ने सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तर्कपूर्ण सोच को भी जन्म दिया। हर दर्शन ने जीवन को देखने का एक नया नज़रिया दिया, कहीं तर्क का रास्ता, कहीं अनुभव का, कहीं ध्यान का और कहीं कर्म का।

तो चलिए अब हम एक-एक करके इन दर्शनों को समझते हैं और देखते हैं कि आखिर हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले हमारे जीवन के रहस्यों को किस तरह समझा था।

हमारे भारतीय दर्शनों को दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है –

1. आस्तिक दर्शन (Vedic / Orthodox)

दर्शन प्रवर्तक प्रमुख उपशाखाएँ / रूप
न्याय दर्शन गौतम ऋषि नव्य-न्याय (गौड़ीय, मैथिल) जैसे गौड़ेश्वर और गंगेश उपाध्याय द्वारा विकसित,
तर्कशास्त्र और प्रमाणशास्त्र की नींव।
वैशेषिक दर्शन कणाद ऋषि परमाणु सिद्धांत वाला दर्शन;
बाद में न्याय दर्शन के साथ मिला-“न्याय-वैशेषिक” परंपरा बनी।
सांख्य दर्शन कपिल मुनि 25 तत्वों का सिद्धांत;
आगे चलकर योग दर्शन से जुड़ गया।
योग दर्शन पतंजलि मुनि सांख्य पर आधारित;
“अष्टांग योग” की परंपरा;
उपशाखाएँ– हठयोग, राजयोग, लययोग, भक्ति योग आदि
पूर्व मीमांसा (कर्ममीमांसा) जैमिनि ऋषि कर्मकांड प्रधान दर्शन;
बाद में दो उपशाखाएँ बनीं– भट्ट मत (कुमारिल भट्ट) और प्रभाकर मत (प्रभाकराचार्य)
उत्तर मीमांसा (वेदांत दर्शन) व्यास मुनि (बाद में आचार्य शंकर, रामानुज, माधव आदि ने विस्तार किया) कई उपशाखाएँ बनीं;
• अद्वैत वेदांत – आदि शंकराचार्य;
• विशिष्टाद्वैत वेदांत – रामानुजाचार्य;
• द्वैत वेदांत – माधवाचार्य;
• द्वैताद्वैत वेदांत – निम्बार्काचार्य;
• शुद्धाद्वैत वेदांत – वल्लभाचार्य;
• अचिन्त्य भेदाभेद वेदांत– चैतन्य महाप्रभु

देखो यहाँ आस्तिक का मतलब भगवान को मानना नहीं है ब्लकि इसका असली मतलब है कि जो वेदों को ज्ञान का प्रमाण(authority) मानते है। ये 6 दर्शन जो वेदों को मानते हैं इन्हें ही षड्दर्शन कहा गया है।

न्याय दर्शन तर्क और प्रमाण के जरिए सही ज्ञान प्राप्त करना बताता है। ‘सही सोचना कैसे है’ यही इसका मुख्य उद्देश्य है।विस्तार से पढ़ें

वैशेषिक– संसार के पदार्थों (matter) और उनकी खासियत को बताता है इसमें परमाणु (atom) सिद्धांत की जानकारी मिलती है। Atomic Theory- अधिक जाने

सांख्य– जो दिखता है वो प्रकृति है, और जो देखता/महसूस करता है वो पुरुष है। विस्तार से पढ़ें

योग– यह मन को नियंत्रित करके ज्ञान और मोक्ष पाने का मार्ग बताता है। ध्यान, साधना और अष्टांग योग इसका आधार है। योग कब सुरु हुआ?

मीमांसा– यह वेदों के कर्मकांड (यज्ञ, पूजा) की व्याख्या करता है। धर्म और कर्म को सबसे महत्वपूर्ण मानता है।

वेदांत– यह ब्रह्म (ultimate reality) और आत्मा के ज्ञान पर आधारित है। जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष (मुक्ति) बताया गया है। महावाक्य

नास्तिक दर्शन (Non-Vedic / Heterodox)

इसमें आस्तिक दर्शनों का ठीक उल्टा है,  यहाँ नास्तिक का मतलब भगवान को न मानना नहीं है ब्लकि जो वेदों को प्रमाण नहीं मानते उन्हें नास्तिक दर्शन कहते हैं जैसे —

दर्शन प्रवर्तक प्रमुख उपशाखाएँ / मत
चार्वाक दर्शन (लोकायत) बृहस्पति – भौतिकवादी दृष्टिकोण (Materialism)
– केवल प्रत्यक्ष ज्ञान को ही सत्य मानते हैं
– आत्मा, ईश्वर और पुनर्जन्म का निषेध
बौद्ध दर्शन गौतम बुद्ध – चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग पर आधारित दर्शन
– प्रमुख उपशाखाएँ:
• वैभाषिक
• सौत्रांतिक
• योगाचार
• माध्यमिक
जैन दर्शन महावीर स्वामी – अहिंसा, अपरिग्रह और सापेक्षवाद पर आधारित दर्शन
– आत्मा और कर्म सिद्धांत को मानता है
– दो प्रमुख शाखाएँ:
• दिगंबर मत
• श्वेतांबर मत

बौद्ध दर्शन हमें दुख, उसके कारण और उससे मुक्ति (निर्वाण) का मार्ग बताता है।

और जैन दर्शन अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम पर जोर देता है।

चार्वाक दर्शन के हिसाब से जो दिखता है वही सच है, बाकी सब बेकार।

हमारे भारतीय दर्शन की खास बात यही है कि यहाँ अलग-अलग सोच को भी जगह दी गई। कुछ दर्शनों ने वेदों को माना (आस्तिक), तो कुछ ने अपने अनुभव और तर्क से अलग रास्ता चुना (नास्तिक)। लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही था जीवन को समझना और उसे बेहतर बनाना।

क्या सच में “मिश्रित दर्शन” कोई official category है?

नहीं, 

दर्शन / परंपरा प्रमुख व्यक्ति / प्रवर्तक टिप्पणी
तंत्र दर्शन परंपरा शिव–शक्ति उपासना से जुड़ी; विशेष रूप से “अगम” ग्रंथों से किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, धीरे-धीरे विकसित हुआ।
भक्ति दर्शन अनेक संत – जैसे रामानुजाचार्य, मीरा, तुलसी, कबीर, चैतन्य आदि यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक आंदोलन था, न कि एक सूत्रकार द्वारा निर्मित प्रणाली।
सूफी दर्शन हज़रत अली, रूमी, बुल्ले शाह, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती आदि इस्लामी रहस्यवाद से प्रभावित विचारधारा, किसी एक प्रवर्तक की नहीं।
नव्य-न्याय दर्शन गंगेश उपाध्याय (13वीं सदी, मिथिला) पुराने न्याय दर्शन का तर्कवादी विस्तार।
आधुनिक भारतीय दर्शन स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, गांधी, टैगोर आदि आधुनिक युग के विचारक, जिन्होंने वेदांत व उपनिषदों की नयी व्याख्या की।

हमारे भारतीय दर्शन की main categories सिर्फ 2 ही मानी जाती हैं आस्तिक दर्शन और नास्तिक दर्शन। 

आपको बता दें कि मिश्रित दर्शन को सिर्फ समझने के लिए ईस्तेमाल करते हैं। अब देखो जैसे कि मान लो कोई दर्शन जो कई बेचारों को मिलाता है तब उसे मिश्रित कह्ते हैं। example –

  • हमरा बौद्ध दर्शन वेदों को नहीं मानता लेकिन ध्यान और मोक्ष जैसी बातें होती हैं। 
  • इसी तरह सांख्य दर्शन वेदों को मानता है लेकिन ईश्वर को जरूरी नहीं मानता

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